केंद्र सरकार द्वारा सिटिजनशिप अमेंडमेंट एक्ट 2019 (CAA) का नोटिफिकेशन किए जाने के एक दिन बाद ही इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ने इस पर रोक लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि पहली नजर में यह एक्ट गैर संवैधानिक है और ऐसे में CAA पर रोक लगाई जाए।
CAA के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका
सुप्रीम कोर्ट में सीएए को पहले ही चुनौती दी गई थी जो मामला पहले से पेंडिंग है। इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) इस मामले में मुख्य याचिकाकर्ता रहा है। सुप्रीम कोर्ट में आईयूएमएल की ओर से सुप्रीम कोर्ट में अंतरिम आवेदन दाखिल किया गया है और कहा गया है कि सीएए के अमल पर रोक लगाई जाए। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल आवेदन में कहा गया है कि इस मामले में बनाया गया नियम मनमाना है। साथ ही कहा गया है कि नागरिकता से संबंधित नियम धर्म के साथ जोड़ा गया है और इसमें जो आधार बनाया गया है उसमें धर्म के नाम पर वर्गीकरण किया गया है और ऐसे में यह पहली नजर में गैर संवैधानिक है और ऐसे में सुप्रीम कोर्ट से गुहार है कि सीएए के अमल पर रोक लगाई जाए
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