तेजस्वी यादव से पहले बीते सोमवार (29 जनवरी) को लालू यादव से ईडी ने 9 घंटे से अधिक देर तक पूछताछ की थी. नौ घंटे से अधिक समय तक चली पूछताछ के बाद वह रात आठ बजकर 50 मिनट पर अपने आवास के लिए रवाना हुए. इस दौरान ईडी दफ्तर के बाहर आरजेडी के कई नेता और कार्यकर्ता डटे रहे. मीसा भारती भी रहीं.
जमीन के बदले नौकरी मामला तब का है जब लालू यादव रेल मंत्री (2004-2009) थे. रेलवे के विभिन्न मंडलों के पदों पर ग्रुप डी की भर्ती निकली थी. आरोप के अनुसार, इस दौरान लालू यादव ने नियुक्ति पाने वाले युवकों के परिजनों से लाखों की जमीन कौड़ियों के दाम खरीदी थी.
मामले का खुलासा होने के बाद सबसे पहले सीबीआई ने 18 मई 2022 को लालू यादव, राबड़ी देवी, मीसा भारती और तेजस्वी यादव समेत 17 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था. आरोप है कि नियुक्ति किए गए उम्मीदवारों ने यादव परिवार के कुछ सदस्यों को अत्यधिक रियायती दरों पर जमीन बेची.
ईडी से पूछताछ को लेकर राजनीति शुरू
बिहार में सरकार बदलने के तुरंत बाद जमीन के बदले नौकरी घोटाला के मामले में ईडी की लालू परिवार से पूछताछ पर राजनीति भी शुरू हो गई है. आरजेडी की नेता सारिका पासवान ने कहा है कि ईडी मजाक का पात्र बन गया है. लालू यादव को डराने के लिए किया जा रहा है.
उधर बीजेपी नेता और बिहार सरकार में उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा है कि जो जैसा कर्म करेगा वैसा फल भोगेगा. राजनीत को सेवा भाव से करने वाले लोग कभी चिंतित नहीं होते. बेफिक्र होकर चैन की नींद में सोते हैं. जो अकूत संपत्ति बना लेता है वो चिंतित रहता है.
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