हर स्कूल को ये सुनिश्चित करना पड़ेगा कि बच्चों के लिए कोरोना से बचाव की सारी व्यवस्था हो…
कोरोना वायरस के दौर में स्कूल खुलने चाहिए या नहीं ? इसे जानने के लिए संयुक्त राष्ट्र की संस्था UNICEF और विश्व स्वास्थ्य संगठन ने एक स्टडी की. इसकी रिपोर्ट में परेशान कर देने वाला सच सामने आया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया के करीब 43 प्रतिशत स्कूलों में बच्चों के लिए साबुन से हाथ धोने की सुविधा नहीं है. दुनिया के करीब 24 प्रतिशत स्कूलों में हाथ धोने के लिए न पानी उपलब्ध है और न ही साबुन. जबकि 19 प्रतिशत स्कूलों में पानी तो उपलब्ध है लेकिन साबुन की सुविधा नहीं है. यानी दुनिया के हर पांच में से दो स्कूलों में साबुन से हाथ धोने की सुविधा उपलब्ध नहीं है, जो कोरोना से बचने के लिए बेहद ज़रूरी है.
रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि दुनिया के 42 प्रतिशत सेकेंडरी स्कूल्ज और 56 प्रतिशत प्राइमरी स्कूल्ज में हाथ धोने की उचित सुविधा नहीं है. ग्रामीण इलाकों में हालत और भी ज़्यादा ख़राब है. जहां तीन में से दो स्कूलों में साबुन से हाथ धोने की व्यवस्था नहीं है. कोरोना महामारी की वजह से पूरी दुनिया में स्कूलों को बंद करना पड़ा. जिससे 190 देशों में 150 करोड़ से ज़्यादा छात्र प्रभावित हुए हैं. संयुक्त राष्ट्र की इस रिपोर्ट के मुताबिक अगर हाथ धोने की उचित व्यवस्था किये बिना स्कूल दोबारा खोल दिये गये तो इससे दुनियाभर में करीब 82 करोड़ बच्चों के कोरोना महामारी से संक्रमित होने का ख़तरा है.
इनमें से सबसे ज़्यादा, करीब 30 करोड़ बच्चे, सब-सहारा अफ्रीका में हैं. करीब साढ़े बारह करोड़ मध्य और दक्षिणी एशिया में रहते हैं. जिनमें से नौ करोड़ से ज़्यादा बच्चे भारत में रहते हैं. जो स्कूलों में साबुन और पानी से हाथ धोने की सुविधा से वंचित हैं. अब, जब भी सरकार स्कूल खोलने का फ़ैसला लेगी तो हर स्कूल को ये सुनिश्चित करना पड़ेगा कि बच्चों के लिए कोरोना से बचाव की सारी व्यवस्था हो.
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