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पैदल चल रही महिला की सड़क पर हुई डिलीवरी 2 घंटे के बाद बच्चे को लेकर चल पड़ी अपने गांव मजदूर !

पैदल चल रही महिला की सड़क पर हुई डिलीवरी 2 घंटे के बाद बच्चे को लेकर चल पड़ी अपने गांव मजदूर !

लॉकडाउन की वजह से मजदूर अब पैदल ही अपने गांव को रवाना हो चुके है। भूखे प्यासे मजदूर अपने पुरे परिवार के साथ हज़ारों किलो मीटर की राह तय कर अपने गांव को निकल पड़े है। बिना ये सोचे की क्या हम अपने मंझिल तक पहुंच पाएंगे की नहीं। स्पेशल ट्रैन चलने के बाद भी हज़ारो लोग सड़को के माध्यम से अपने गांव रवाना हो रहे है। इस बीच मजदूरों को लेकर तरह तरह की खबर सामने आ रही है। और अब हम आपको एक ऐसी खबर सुनाने जा रहे है जिसको सुनने के बाद आप हैरान रह जायेंगे दरअसल : एक 8 महीने की गर्ववती महिला जो अपने परिवार के साथ अपने गांव जाने के लिए रवाना हुई थी।

30 किलोमीटर पैदल चलने के बाद गर्भवती महिला ने चिलचिलाती धूप में सड़क पर ही बच्चे को जन्म दिया. अभी बच्चा होने की खुशी ढंग से मनी भी नहीं थी कि महिला प्रसव के 2 घंटे बाद ही बच्चे को लेकर पैदल चलने लगी. चौंकाने वाला यह वाकया मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले में सामने आया. इस खबर को सुनने के बाद हर कोई हैरान है। आपको बता दे लॉकडाउन में नासिक से 30 किलोमीटर पहले से पैदल चल कर कर आ रही दो मजदूरों की पत्नियां गर्भवती थी जिसमें से एक महिला शकुंतला ने महाराष्ट्र के पीपरी गांव में बच्चे को जन्म दे दिया. सड़क किनारे ही साथ चल रही महिलाओं ने साड़ी की आड़ कर महिला का प्रसव कराया.

लेकिन जहाँ हम ये खबर सुनते है की प्रसव के बाद महिलाये दो दो महीने बिस्तर से उठ नहीं पाती , लेकिन एक ऐसे महिला भी है जिसने बच्चे को जन्म देने के दो घंटे के बाद ही अपनी मंझिल की और रवाना हो गई। यह परिवार पैदल चलते हुए रविवार को मध्य प्रदेश के सेंधवा पहुंचे. इसके साथ में चल रहे अन्य मजदूर की पत्नी 8 माह के गर्भ से थी लेकिन इस चिलचिलाती धूप में अपने सफर को जारी रखे हुए थी. महिला के पति राकेश ने बताया कि हम नासिक से 30 किलोमीटर दूर रहते थे. वहां से आ रहे हैं और एमपी के सतना जिले में पैदल जा रहे हैं. मेरे साथ में मेरी पत्नी है और बच्चे हैं. वहां से चले और पीपरी गांव तक पहुंचे तो मेरी बीवी की डिलीवरी हो गई. बाई लोगों ने उसे पकड़ के साइड में लिया और साड़ियों की आड़ में डिलीवरी कराई. हम वहां 2 घंटा रुके और फिर अपने गांव अपनी पत्नी और बच्चे को लेकर पैदल चल दिए. सोचिये मजदूर कितना मजदूर था की ऐसे अवस्था में कड़ी धुप में चल कर अपने घर पहुंची।

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