मध्य प्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया के इस्तीफे के बाद कांग्रेस के 22 बागी विधायकों ने भी इस्तीफा दिया है। जिसके बाद मध्य प्रदेश की सरकार कभी भी गिर सकती है. इस बीच बीजेपी बार बार टेस्ट फ्लोर की बात कर रही है. तो आपके मन में भी ये सवाल आ रहा होगा की आखिर टेस्ट फ्लोर क्या होता है. अगर आपको नहीं पता तो हम आपको बताने जा रहे है की आखिर टेस्ट फ्लोर क्या होता है
फ्लोर टेस्ट एक ऐसी प्रक्रिया होती है, जिससे फैसला किया जाता है कि, वर्तमान सरकार या मुख्यमंत्री के पास पर्याप्त बहुमत है या नही है | यह एक प्रकार से सदन में चलने वाली एक पारदर्शी प्रक्रिया होती है जिसमें, राज्यपाल किसी भी तरह से कोई हस्तक्षेप नही कर सकता है| फ्लोर टेस्ट का सबसे अधिक महत्व सत्ता में मौजूद पार्टी के लिए होता है क्योंकि, उसे फ्लोर टेस्ट में अपना बहुमत साबित करना होता है | मालूम हो सभी विधायक प्लोर टेस्ट प्रक्रिया में स्पीकर के सामने अपना वोट करते है | यदि किसी राज्य में एक से अधिक पार्टियां सरकार बनने के लिए कहती है, लेकिन उन पार्टियों को बहुमत प्राप्त न होने की वजह से किसी एक पार्टी को फ्लोर टेस्ट में राज्यपाल के द्वारा बहुमत साबित करने के लिए कहा जा सकता है कि, किसे बहुमत प्राप्त है |
टेस्ट फ्लोर यह बहुमत सदन में उपस्थित विधायकों के वोटिंग के आधार पर कराया जाता है |इसके साथ ही यदि सभी पार्टियों के मतदान बराबर हो रहे है, तो इसमें फ्लोर टेस्ट एक संवैधानिक प्रावधान है। इसके लिए सरकार द्वारा विधानसभा में विश्वास प्रस्ताव रखा जाता है, जिसके लिए सदन में मतदान होता है। जब एक से अधिक लोग सरकार बनाने का दावा पेश करते हैं, और बहुमत साफ नहीं होता है, तो राज्यपाल विशेष सत्र बुलाकर साबित करने को कह सकते हैं, कि यह बहुमत किसे प्राप्त है। फ्लोर टेस्ट में ही सभी विधायक मौखिक, ईवीएम या बैलेट पेपर के जरिये ही अपना मतदान करते हैं| वहीं, यदि बहुमत साबित नहीं हो पाता है तो इसका मतलब होता है कि, सदन को सरकार पर विश्वास नहीं रह गया है | इसलिए बहुमत प्राप्त न होने पर मुख्यमंत्री के साथ-साथ पूरी कैबिनेट को मजबूरन इस्तीफा देना पड़ जाता है | वहीं काफी बार सरकारें अपने पास विधायकों की कमी को देखते हुए विश्वास मत से पहले ही इस्तीफा कर देती है | जब किसी पार्टी को स्पष्ट बहुमत प्राप्त हो जाता है, तो राज्यपाल उस पार्टी के नेता को सीएम पद की शपथ दिलाने का काम करते है | तो इसे कहते है फ्लोर टेस्ट।
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